वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने किया इंद्रावती में पहली जंगल सफारी और अचानकमार के केंवची गेट से बफर सफारी का शुभारंभ
रायपुर:
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव (1 नवंबर) के गौरवशाली अवसर पर प्रदेश के पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के दिन सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) में पहली बार ‘जंगल सफारी’ का वर्चुअल शुभारंभ किया। इसके साथ ही अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से बफर सफारी का भी आगाज़ हुआ। इस बहुप्रतीक्षित शुभारंभ के साथ ही पर्यटकों के लिए सफारी की बुकिंग पूरी तरह से शुरू हो गयी।
दशकों के संघर्ष के बाद प्रकृति की ओर वापसी:
बस्तर की धरती, जो वर्षों तक वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित रही, अब एक नई सुबह की गवाह बन रही है। इस कठिन दौर के अंत के बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है। यहाँ के शांत जंगलों में बाघों की आहट, राजकीय पशु वन भैंसों की विरासत, गिद्धों की ऊँची उड़ान और अनगिनत जीवों की दुनिया बसती है, जिसे अब पर्यटक करीब से देख सकेंगे।
सुरक्षित सफर और बेहतरीन सुविधाएँ:
सफारी के रोमांच को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए फिलहाल 4 जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। सफारी के दौरान पर्यटकों को टूर गाइड और चाय-नाश्ते की सुविधा भी मिलेगी। इस पूरी व्यवस्था की कमान स्थानीय ग्रामीणों के हाथों में है। सफारी संचालन, आतिथ्य और प्रकृति की सटीक जानकारी के लिए इन युवाओं को ‘कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान’ में विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है, ताकि वे कुशल गाइड और मेजबान बनकर पर्यटकों को विश्वस्तरीय अनुभव दे सकें।
सुगम पहुंच और सफारी का रूट:
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी का शुरुआती बिंदु (प्रवेश द्वार) ‘उलूर’ गांव को बनाया गया है। यह सफारी बेस कैंप बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पर्यटक बीजापुर से भोपालपटनम होते हुए उलूर पहुंचेंगे, जहाँ से विशेष रूप से तैयार की गई जिप्सियों के जरिए वे घने जंगलों के बीच वन्यजीवों की दुनिया को करीब से देख सकेंगे।
रोजगार और आत्मनिर्भरता के खुलेंगे नए द्वार:
यह जंगल सफारी केवल वन भ्रमण का साधन नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की ठोस शुरुआत है। इस ईको-टूरिज्म पहल से स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड और सफारी वाहन चालक के रूप में सीधा रोजगार मिलेगा। ‘होम स्टे’ के जरिए ग्रामीण परिवारों को पर्यटकों के आतिथ्य से नई आजीविका मिलेगी। स्थानीय महिलाओं के पारंपरिक व्यंजनों और बस्तर के कारीगरों के बेजोड़ हस्तशिल्प को नया बाजार और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
बस्तर की धड़कन है इंद्रावती:
इंद्रावती टाइगर रिजर्व सिर्फ एक जंगल नहीं, बस्तर की धड़कन और उसकी वास्तविक पहचान है। यह अनमोल विरासत अब भविष्य के जिम्मेदार पर्यटन की नींव रखने जा रही है। इस सफारी से बस्तर छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा और पूरे क्षेत्र के विकास, शांति और प्रकृति संरक्षण का एक शानदार मॉडल बनेगा।
अचानकमार में रोमांच के नए सफर का आगाज़:
मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व (लोरमी) में राज्य स्थापना दिवस पर केंवची गेट से बफर सफारी शुरू हो रही है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही से अमरकंटक मार्ग पर एन.एच.-45 पर स्थित यह गेट इस वर्ष पहली बार पर्यटकों के लिए खुल रहा है। शिवतराई गेट पहले से संचालित है। मानसून के कारण बंद रहीं पर्यटन और इको-टूरिज्म गतिविधियाँ भी अब फिर से शुरू होंगी। केंवची गेट के खुलने से अमरकंटक-अचानकमार-रतनपुर पर्यटन सर्किट आकार लेगा।
914.017 वर्ग कि.मी. में फैले इस रिजर्व में कोर जोन 626.195 और बफर जोन 287.822 वर्ग कि.मी. है। सफारी का 50 कि.मी. लंबा रूट केंवची गेट से भैरोसांगफाटर, सेमर वॉच टॉवर (कचांदी तिराहा), कचांदी रोड, जलांगो तिराहा, दरियाबूट पेट्रोलिंग कैंप और आमाडोब बैरियर होते हुए वापस केंवची गेट तक जाएगा। सफारी के लिए 1 जिप्सी (₹3,500 प्रति राउंड) और 3 महारानी वाहन (₹5,000 प्रति राउंड) उपलब्ध रहेंगे। पर्यटकों के ठहरने के लिए केंवची गेट के निकट पर्यटन विभाग का सोनभद्र रिसोर्ट और कई निजी रिसोर्ट मौजूद हैं।
जंगल के रोमांच की झलक:
यहाँ पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, चीतल, सांभर, कोटरी, सोनकुत्ता और जंगली सूअर के साथ मोर और मनियारी नदी के ऊदबिलाव देखने का मौका मिलेगा। सिहावल सागर (मनियारी नदी का उद्गम और हाथी कैंप), माझी डोंगरी वॉच टावर, जहाँ से अचानकमार का मनोरम दृश्य दिखता है, और जल्दा ग्रासलैंड, जहाँ बाइसन आसानी से नजर आते हैं, भी इस सफर के प्रमुख आकर्षण हैं।
यहाँ भी खुलेंगे रोजगार के द्वार:
केंवची गेट के खुलने से रिसॉर्ट, होटल और होम-स्टे के साथ प्रशिक्षित जिप्सी गाइडों और चालकों को काम मिलेगा। रेस्टोरेंट और सोवेनियर शॉप के संचालन से भी स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
इन सफारी के शुरू होने से न केवल छत्तीसगढ़ पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा, बल्कि यह क्षेत्र के विकास, शांति और प्रकृति संरक्षण का एक शानदार मॉडल बनकर सामने आएगा।


