वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के दूरदर्शी मार्गदर्शन में नया रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक ; हरित निवेश, ग्रामीण आजीविका और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का रोडमैप निर्माण ।
रायपुर, 20 अगस्त 2026 — छत्तीसगढ़ अपनी प्रचुर कृषि संपदा, वन बायोमास और जैविक कचरे को हरित ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि के एक शक्तिशाली इंजन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने के लिए आज नया रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र (CGSCCC), सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (CEED) और छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) के संयुक्त तत्वावधान में एक उच्च स्तरीय बैठक एवं चर्चा का आयोजन किया गया। इस उत्साहवर्धक संवाद का मुख्य उद्देश्य राज्य की क्षेत्रीय क्षमताओं को राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों के साथ जोड़ना और समावेशी आर्थिक विकास तथा औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन में कमी) को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था।
राज्य सरकार ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026’ और ‘औद्योगिक विकास नीति 2024–30’ जैसी दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से इस हरित क्रांति का पूरी तरह से समर्थन कर रही है। ये नीतियां बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए एक बेहद अनुकूल और व्यापक प्रोत्साहन ढांचा प्रदान करती हैं। इन मजबूत नीतियों के बल पर, छत्तीसगढ़ फसल अवशेषों, मवेशियों के गोबर और नगरीय जैविक कचरे का व्यवस्थित उपयोग कर प्रतिवर्ष 5 लाख टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने की दिशा में पूरे उत्साह से काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य केवल संयंत्र लगाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा संपन्न और स्केलेबल इकोसिस्टम बनाना है जो बड़े पैमाने पर निजी हरित निवेश को आकर्षित कर सके।
आज के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के दिग्गजों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस बैठक की अध्यक्षता वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सीसीएफ श्री आलोक तिवारी (IFS),और छत्तीसगढ़ स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड के सदस्य-सचिव श्री अमिताभ वाजपेयी (IFS) ने की। इनके साथ ही सेंटर फॉर एन्वायरन्मेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट के सीईओ श्री रमापति कुमार एवं उद्योग और अकादमिक जगत के प्रतिनिधि जैसे संतोष वार्ष्णेय (भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड), चंद्रमौली सिंह (रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड), डॉ. प्रवीण डी. चेंडगे, विशाल जाधव (जिंदल पावर लिमिटेड), और श्री विशाल प्रसाद गुप्ता (एनर्जी कोर इंडिया), रायपुर नगर निगम से श्री योगेश कुमार काडू, रांची -झारखंड से विषय विशेषज्ञ श्री पुलकित श्रोत्रय एवं विशाल प्रसाद गुप्ता (निदेशक,एनर्जी कोर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) ने तकनीकी सत्र में बायोएनर्जी पर अपनी संस्थाओं के द्वारा की गई पहलों पर प्रस्तुति दी । इसके अतिरिक्त डॉ. अनिल श्रीवास्तव, अश्वनी अशोक, डॉ. देवयानी शर्मा ने अपने विचार साझा किए।
सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, सीबीडीए के सीईओ श्री सुमित सरकार ने कहा कि हमें बायोमास को केवल कृषि अवशेष मानने के बजाय समग्र विकास को गति देने वाले एक रणनीतिक आर्थिक संसाधन के रूप में देखना चाहिए। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सीसीएफ श्री आलोक तिवारी (IFS) ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि बायोमास संग्रहण के लिए ‘क्लस्टर-आधारित’ दृष्टिकोण अपनाने से न केवल लॉजिस्टिक लागत घटेगी, बल्कि हमारे परिश्रमी किसानों को कहीं अधिक बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा। वहीं, सीड (CEED) के सीईओ श्री रमापति कुमार ने विश्वास जताया कि इन बायोएनर्जी लक्ष्यों को जमीनी हकीकत में बदलने के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, उद्योग और वित्त विभागों के बीच समन्वय स्थापित हो रहा है।
इस अत्यंत सकारात्मक और ऊर्जावान संवाद का समापन उन सशक्त संकल्पों के साथ हुआ, जो छत्तीसगढ़ को बायो-रिसोर्स अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाएंगे। किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), सहकारी समितियों और स्व-सहायता समूहों (SHGs) को बायोमास आपूर्ति श्रृंखला का नेतृत्व सौंपने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। विशाल भंडारण बुनियादी ढांचे के निर्माण और वर्ष भर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने से, राज्य पूरी तरह से ग्रामीण समुदायों की आय को स्थिर करने और एक स्थायी, समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ने के लिए तैयार है।



